
आवश्यक सूचना


अपार दुःख के साथ सूचित किया जाता है कि आश्रम के संरक्षक स्वामी चंद्रानंद जी महाराज (भगत बाबा) ने आज सुबह (२६-११-२०२०) को पार्थिव शरीर का परित्याग कर दिया ।
आम सत्संगियों एवं साधकों को सूचित किया जाता है कि Covid-19 के कारण आगामी दुर्गा पूजा के अवसर पे होने वाला नौ दिवसीय ध्यानाभ्यास कार्यक्रम स्थगित रहेगा ।
स्वामी चंद्रानंद जी महाराज का पार्थिव शरीर

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aboutAASHRAM
A satsang aashram belonging to Santmat Community. Established under the guidance of great saint of 20th century Sant Sadguru Maharishi Mehi Paramhans Jee Maharaj in 1927. Currently run by the elected aashram committee.
ONE OF THE OLDEST 3 AASHRAMS ESTABLISHED UNDER SUPERVISION OF GURU MAHARAJ HIMSELF
श्री संतमत सत्संग मंदिर , मधुबनी , पूर्णियाँ का संक्षिप्त इतिहास
महर्षि मेँहीँ - पदावली
(सन्तमत-सिद्धांत-सहित)
निज तन में खोज सज्जन ,बाहर ना खोजना । अपने ही घट में हरि हैं, अपने में खोजना।।
चाह गई चिंता मिटी, मनुवां बेपरवाह ।
जाको कछु न चाहिए ,सोइ शहंशाह ।।
मंगल मूरति सतगुरु ,मिलावै सर्वाधार ।
मंगलमय मंगलकरण, विनवौं बारंबार।। धन्य धन्य सद्गुरु सुखद, महिमा कही न जाय । जो कुछ कहूँ तुम्हारी कृपा, मोते कछु न बसाय।।
आओं वीरों मर्द बनो , अब जेल तुम्हे तजना होगा। मन-निग्रह के समर क्षेत्र में, सन्मुख थिर डाटना होगा।।
सुनिये सकल जगत के वासी ।
यह जग नश्वर सकल विनाशी।।
सत्संग नित अरु ध्यान नित, रहिये करत संलग्न हो। व्यभिचार, चोरी, नशा, हिंसा, झूठ तजना चाहिये॥
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![]() दुर्लभ स्मृतियाँ | ![]() दुर्लभ स्मृतियाँ | ![]() दुर्लभ स्मृतियाँ |
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